"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे" — इस क्षेत्र के दर्शन मात्र से ही दुर्गति का नाश होता है।
यहाँ प्रथम चैत्यवंदन के मंत्र दिए जा रहे हैं। सभी पाँचों के लिए मूल मंत्र समान हैं, केवल तीर्थंकर का नाम और मंदिर का स्थान बदलता है। हम यहाँ (आदिनाथ मंदिर के लिए) पूर्ण अर्थ सहित दे रहे हैं। इसी प्रकार अन्य चार मंदिरों पर तीर्थंकर के नाम बदलकर (ऋषभनाथ के स्थान पर शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरनाथ, पार्श्वनाथ आदि) दोहराया जाता है।
पलिताना (शत्रुंजय महातीर्थ)
नीचे इन 5 चैत्यवंदनों का पूर्ण विवरण और विधि दी गई है:
भगवान के दर्शन करते ही 'नमो जिणाणं' बोलकर वंदन करें। खमासमण: